पिछले चार वर्षो में योगी सरकार एक भी युवा को उच्च शिक्षा में नौकरी नहीं दे पाई- डाॅ0 सी0पी0 राय
उच्च शिक्षा के कॉलेजों में शिक्षकों का बिना वेतन के गुजर रहा जुलाई का महीना

पिछले चार वर्षों में प्रदेश की योगी सरकार एक भी युवा को उच्च शिक्षा में नौकरी नहीं दी पाई है। उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग उत्तर प्रदेश द्वारा वर्ष 2022 में जारी किए गए विज्ञापन संख्या 51 के तहत 13 विषयों के 910 पदों पर भर्ती प्रकिया अभी तक अधर में लटकी हुई है। इस प्रकार पिछले चार वर्षो में यह सरकार एक भी युवा को उच्च शिक्षा में नौकरी नहीं दे पाई है।
उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग के चेयरमैन-पूर्व मंत्री डाॅ0 सी0पी0 राय ने आज जारी बयान में कहा है कि नए शिक्षा आयोग के गठन व अन्य कारणों से यह परीक्षा अप्रैल 2025 में संपन्न हुई। इस परीक्षा में भारी गड़बड़ी के कारण अभ्यर्थियों द्वारा लगातार धरना दिया गया और कोर्ट का सहारा लिया गया। बाद में शासन ने और आयोग ने अपनी गलती मानी और यह माना की पांच विषयों का पेपर आउट हुआ था और इसलिए पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई। बाद में पुनः परीक्षा 19 – 20 अप्रैल 2026 को संपन्न कराई गई जिसका साक्षात्कार 22 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक होना था। लेकिन अभ्यर्थियों द्वारा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में यह मांग रखी गई कि यदि पांच विषयों में नकल हुई है या पेपर आउट हुआ है तो केवल उन्हीं की परीक्षा कराई जाए बाकी विषयों का साक्षात्कार पुराने परीक्षा परिणाम पर ही कराया जाए। इसी प्रकरण को लेकर 21 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। जो साक्षात्कार 22 जुलाई से शुरू होना था वह भी स्थगित कर दिया गया है।
डाॅ0 सी0पी0 राय ने कहा कि साथ ही उ0प्र0 सरकार की नाक के नीचे 22 से अधिक भर्तियांे में आरक्षण की लूट हुई है। बेसिक शिक्षा विभाग में बड़े स्तर पर और नियमित रूप से वर्ष 2018 से भर्ती नहीं हो सकी है।
डाॅ0 राय ने कहा कि इतना ही नहीं उच्च शिक्षा के कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मचारिकों का बिना वेतन के ही जुलाई माह गुजर रहा है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। ट्रेजरी से वेतन निर्गत करने के लिए कोडिंग सिस्टम में हुए बदलाव के कारण उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े प्रदेश के स्नातक एवं परास्नातक महाविद्यालयों के शिक्षकों को जून माह का वेतन अब तक नहीं मिल सका है। जुलाई के महीने में बच्चों के प्रवेश, यूनिफॉर्म और किताबों की खरीद का अभिभावकों पर दबाव रहता है। इसके अलावा जिन्होंने बैंकों से लोन ले रखा है उनकी ईएमआई की कटौती भी आमतौर से 20 तारीख के पहले हो जाती है। किंतु जुलाई के इस खर्चीले महीने में अभी तक उच्च शिक्षा के कॉलेजों में वेतन न मिलना चिंता का विषय बना हुआ है।
डाॅ0 राय ने कहा कि उच्च शिक्षा के शिक्षकों का कहना है कि कोई भी व्यवस्था बनाने से पहले वेतन की निरंतरता का ख्याल रखा जाना चाहिए था। पूरे प्रदेश का वेतन रोककर व्यवस्था पर विचार विमर्श किया जाना कतई उचित नहीं था। कोडिंग व्यवस्था पर निर्णय होने के बाद 22 जुलाई को जिलेवार ग्रांट का जारी किया जाना भी इस सरकार की लेट लतीफी का एक और उदाहरण है। वेतन न मिलने से उच्च शिक्षा के शिक्षकों और उनके परिजनों में रोष व्याप्त है।



