राजनीति

जंतर मंतर पर ‘पुलिसिया दमन’ से मुरली मनोहर जोशी दुखी- ‘युवतियों से बदसलूकी बेहद दर्दनाक’

जंतर मंतर पर छात्रों पर पुलिसिया दमन के ख़िलाफ़ अब बीजेपी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी उतर आए हैं। छात्र आंदोलन और 20 जुलाई को हुए पुलिस बल प्रयोग को लेकर मुरली मनोहर जोशी ने चिंता जताई है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान युवतियों के साथ हुई कथित बदसलूकी को ‘बेहद दर्दनाक’ बताया। उन्होंने कहा कि देशभर से आए छात्रों की चिंताएं वास्तविक हैं और उनके साथ संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए। 92 वर्षीय जोशी इस मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया देने वाले बीजेपी के पहले वरिष्ठ नेता माने जा रहे हैं।

मुरली मनोहर जोशी ने एक्स पर जारी अपने संदेश में लिखा कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्र कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर अपनी मांगों को लेकर बैठे हैं। उन्होंने कहा, ‘देश के विभिन्न भागों से आए युवा छात्र कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर जुटे हैं। परीक्षा व्यवस्था को लेकर उनकी चिंताएं और सरोकार वास्तविक हैं। इन्हें सहानुभूति और स्थायी समाधान की इच्छा के साथ सुना जाना चाहिए।’

युवतियों से बदसलूकी बेहद पीड़ादायक’

जोशी ने पुलिस कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था का मामला मानकर बल प्रयोग करना उचित नहीं होगा। उन्होंने लिखा, ‘मुझे अत्यंत पीड़ा हुई है कि महिलाओं और युवतियों के साथ भी निर्मम व्यवहार किया गया। छात्रों पर इस तरह का बल प्रयोग समाज के बड़े वर्ग को विकसित भारत के लक्ष्य से दूर कर सकता है।’

कौन हैं मुरली मनोहर जोशी?

मुरली मनोहर जोशी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक नेताओं में शामिल हैं। वह 1991 से 1993 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।

वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर रह चुके हैं और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 1998 से 2004 तक मानव संसाधन विकास मंत्री रहे थे। वर्तमान में वे बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं।

बाक़ी बीजेपी नेताओं का रुख अलग

बाक़ी बीजेपी नेताओं ने मुरली मनोहर जोशी से अलग रुख अपनाया है। उन्होंने मोटे तौर पर छात्र आंदोलन को लेकर विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया और पुलिस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़रूरी बताया। उनके बयानों में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक साजिश की चर्चा अधिक प्रमुख रही।

जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार संसद में पेपर लीक पर 12 घंटे या 18 घंटे तक चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही विपक्ष, खासकर राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘पेपर लीक को राजनीति का विषय न बनाया जाए। राहुल गांधी चुनिंदा राज्यों के मामलों को उठा रहे हैं। कांग्रेस और विपक्ष शासित राज्यों के पेपर लीक पर चुप रहते हैं। सरकार हर मामले की जांच के लिए तैयार है।’ यानी नड्डा का जोर आंदोलन की मांगों से अधिक विपक्ष की राजनीति पर रहा।
राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने के बाद बीजेपी नेताओं ने इसे ‘बचकाना’ बताया और कहा कि संसद चल रही है, ऐसे में सड़क पर धरना देना सही नहीं। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राहुल ‘अराजकता का माहौल’ बनाना चाहते हैं और कांग्रेस छात्रों के मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। दिल्ली पुलिस और सरकार ने लगातार कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, पुलिस ने केवल ‘हल्का बल’ इस्तेमाल किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी।

आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश के आरोप

आंदोलन से जुड़े लोगों और विपक्ष ने आरोप लगाया कि आंदोलन को कई तरह से कमजोर या बदनाम करने की कोशिश हुई। आंदोलन को विपक्ष प्रायोजित बताया गया, प्रदर्शनकारियों को कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया गया, सोशल मीडिया पर आंदोलनकारियों को ‘अराजक’, ‘राजनीतिक एजेंट’ या ‘देश विरोधी एजेंडा’ से जोड़ने वाले दावे किए गए।

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